rpmwu352 dt. 14.05.2020
हिन्दू_मुस्लिम_व_क्रिश्चियन तीनों धर्मों को मानने वाले अनुयायियों ने मानवता को शर्मसार करने वाले कृत किये हैं। अत: इन परम्परागत धर्मों की मान्यताओं को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है जहां मनुष्य मनुष्य का आदर व सम्मान करें।
सर्व विदित है की हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से #जाति_के_नाम_पर बड़े-बड़े योद्धाओं तक के साथ #भेदभाव हुआ। #महाभारत में जाति के आधार पर #कर्ण एवं #एकलव्य के साथ जो अपमान व अन्याय हुआ, उससे सभी भलीभांति परिचित हैं। उसके बाद के काल में #अस्पृश्यता की वजह से मनुष्य ने दूसरे मनुष्यों के साथ इतने ज्यादा अत्याचार किए जहां मनुष्य को जानवर से भी ज्यादा खराब तरह से ट्रीट किया गया। मंदिरों व गांवों में समुदाय विशेष की लड़कियों के साथ ऐसे जुल्म ढाए जाते थे जिन्हें लिखना तक उचित नहीं है। कई जाति समुदाय के लोगों को #शिक्षा ग्रहण करने की #अनुमति_नहीं थी, उनके लिए #पढ़ाई_करना_पाप था। यह केवल इसलिए किया गया कि यदि उन समुदायों व जातियों के लोग पढ़ लिख जाएंगे तो वे अधिकारों की मांग करेंगे और जो अत्याचारी लोग थे उनके लिए काम करने वाले लोगों की कमी हो जायेगी।
#मुस्लिम_धर्म को मानने वालों को देखें तो इसमें इतिहास #हिंसा व #अत्याचार से भरा पड़ा है। भारत में जितने भी मुस्लिम आक्रमण हुए अथवा जब उनके लोग बादशाह या सुल्तान बने तो अधिकांश ने हिंदू जनसंख्या को #बलपूर्वक_मुसलमान बनाया। अफ्रीका के #गैर_मुस्लिम_काले_लोगों को #दास बनाकर विभिन्न तरह से मानवता को शर्मसार किया। आज भी कट्टर मुस्लिम, हिंदुओं एवं दुसरे धर्म के लोगों को #काफिर मानते हैं। उनका वश चले तो पृथ्वी को काफिरों से मुक्त कर दें।
क्रिश्चियनिटी को मानने वालों ने तो हिन्दू व मुस्लिम दोनों से बढ़कर काले लोगों को दास बनाकर जानवरों की तरह बेचा व जानवरों से भी खराब व्यवहार किया। संपूर्ण संसार में क्रिश्चियनिटी को मानने वाले यूरोपियनस् ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ़्रीका के #इंडिजेनस_लोगों के साथ जितना #अत्याचार किया वह शायद ही किसी दूसरे धर्म को मानने वाले लोगों ने किया होगा। अफ्रीका के #काले_लोगों को तो जहाजों में अमानवीय कंडीशन में ट्रांसपोर्ट करके ब्राजील और अमेरिका ले जाया गया और उन्हें #भयंकर_यातना से भरे जीवन जीने के लिए मजबूर किया जाता रहा।
उक्तानुसार यदि देखें तो हिंदू, मुस्लिम एवं क्रिश्चियनिटी मानने वाले सभी लोगों ने #दूसरे_लोगों को #गंभीर_यातनाएं दी एवं #अमानवीय_अत्याचार किये। फिर कैसे कह सकते हैं कि धर्म व्यक्ति को मानवता सिखाता है? #धार्मिक_पाखंड की वजह से ही समाज के निचले तबकों का शोषण हुआ है जबकि वास्तविक धर्म की राह पर चलकर तो उनका कल्याण होना चाहिये था।
#DAP अर्थात् धार्मिक अंधविश्वास के प्रदुषण पर भगवान गौतम बुद्ध का प्रहार काफी असरदार रहा है। उन्होंने ऊंच-नीच व अस्पृश्यता का खुले में विरोध करके मनुष्य को मनुष्य पर किये जाने वाले अमानवीय अपराध करने से रोका और सही राह दिखाई। भारत सहित कई देशों के लोगों ने उनके द्वारा बताये गये मानवता के सम्मान के रास्ते को अपनाया और मानव सभ्यता के इतिहास में एक सुखद अध्याय जोड़ा।
अब स्वतंत्र देश में सभी को पढ़ने लिखने की आजादी है। एतिहासिक घटनाओं व धार्मिक क्रिया कलापों को समझने का प्रयास करें और स्वविवेक से निर्णय ले कि कौनसा रास्ता सही है?
कृपया इस विषय पर मनन करके अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।
रघुवीर प्रसाद मीना
Good evening sir
ReplyDeleteसर, दिलोदिमाग, सत्यता और मानवता को साक्ष्य मानकर मैं यह करूँ कि यह लेख बहुत ही अविस्मरणीय है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी yani
सर, दिलोदिमाग, सत्यता और मानवता को साक्ष्य मानकर मैं यह करूँ कि यह लेख बहुत ही अविस्मरणीय है, और इसमें आपने अब तक विश्व में हुई घटनाओं की सत्यता के आधार पर जो समीक्षा की है, उसमें बिना किसी लाग लपेट के, मानवता के आधार पर इनकी तुलना की है और ये सभी मुख्य मुख्य धर्म अपने वास्तविक धर्म से भटक कर सिर्फ अपना मतलब सिद्ध किया है और आने वाले समय में मानवता और बेहतर हो, के लिए सभी को समानता का अधिकार मिले के लिए सही दिशा दिखाई है l
ReplyDeleteधन्यवाद
बहुत-बहुत आभार
लखन लाल मीना
आपका लेख कटु सत्य से भरा है और अब तक के मानव काल में, एक बहुत छोटा काल रहा है जिसमें कुछ महान व्यक्तित्व पैदा हुए हैं जिन्होंने मानवता, धर्म का वाकई मतलब समझा और जीवन में उतारा और जनता को भी विकास का मौक़ा दिया, उनके अधिकार दिये l
ReplyDeleteऔर बाकी का सारा काल, ग़रीबों, किसान, मजदूर, मेहनती लोगों के लिए, भीभतस काल बनकर बरसा है l बार बार मानवता और धर्म का चीर हरन हुआ है l
Thanks dear Lakhan!
DeletePerfect narratioln of religion.
ReplyDeleteD G Shrimali
Deleteधार्मिक होने का मतलब ही है अमानवीय होना ! अतः आदमी को धर्मांध होने के बजाय मानवतावादी होना चाहिए , कार्य में कोई विभेद नही होना चाहिए , सभी को उसकी शारीरिक क्षमता एवं रूचि के अनुरूप ही काम मिलना चाहिए इस लिए जाति व धर्म समाप्त होना चाहिए !
ReplyDeleteबिलकुल सही।
DeleteFor the society of world at large, there should not be any religion. A world without religion will solve 80% problem of world. Cause of large no problem is religion.
ReplyDeleteसही।
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