Sunday, 30 July 2017

समाज को लाभान्वित होने की उम्मीद.....

‌rpmwu113
30.07.2017

हमारे समाज में अच्छे पढेलिखे, बेहद अनुभवी व समझदार सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। श्री प्रभुदयाल मीना व श्री पृथ्वीराज मीना, दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा, भीलवाड़ा जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रमेशचंद्र मीना व कई अन्य दिनांक 31.07.2017 को सेवानिवृत्त होने जा रहे है।
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‌आने वाले दिनों में ऐसे महानुभावों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। आवश्यकता है कि ऐसे सभी लोगो के अनुभव व एनर्जी का समाज हित में सदोपयोग हो। देखने में यह भी आया है कि कई लोग सेवानिवृत्ति के पश्चात या तो स्वमं के परिवार के कार्यों या धार्मिक अंधविश्वास के प्रदुषण में इतने व्यस्त हो जाते है कि वे समाज से और अधिक कटआॅफ हो जाते हैं।
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‌ समाज को भी चाहिये कि एेसे अनुभवी लोगों को आदर दें ताकि उनके मन में समाज सेवा हेतु और जिज्ञासा जाग्रत हो।
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‌ कृपया सभी अपने अपने विचार व्यक्त करें कि किस तरह समाज, सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों से अघिक से अधिक लाभान्वित हो सके।
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‌ रघुवीर प्रसाद मीना

Tuesday, 18 April 2017

समाज के पढेलिखे लोग खरे नहीं उतर रहे है भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की अपेक्षाओं पर....

rpmwu112
17.04.2017

भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की अपेक्षाओं पर समाज के लोग खरे नहीं उतर रहे है, इस बात को व्यंगात्मक रुप में समझाने के लिए कल्पित कहानी है कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जब लंदन में गोलमेज सम्मेलन में गए तो वहाँ उन्हें बडा सम्मान मिला, बराबर बिठाया व उनकी बातों को तबज्जो मिली। प्रसन्नता के माहोल में बाबा साहेब सम्मेलन के पश्चात्  एक बगीचे में गए और वहां पर देखा कि बगीचे में विभिन्न प्रकार के फलदार वृक्ष है, बाबा साहेब को लगा कि इन फलदार वृक्षों के बीज अगर मैं भारत में लेकर जाऊं और वहां पर भी ऐसा ही बगीचा विकसित कर दूँ तो भारत के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका फायदा होता रहेगा। इसी अवधारणा के साथ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर उन फलदार वृक्षों के बीजों को भारत में लेकर आए और जो भी अच्छी जगह संभव हो सकती थी वहां पर उन्होंने उन बीजों का वृक्षारोपण किया, रात दिन मेहनत करके, पानी से सींचकर व खाद तथा उर्वरक डालकर परवरिस की।
जब वृक्ष बडे़ हो गये थे तो बाबा साहेब ने देखा कि उनमें से अधिकांश वृक्षों में फल ही नहीं आ रहे है, वे केवल ढूँढ ही रह गये है, कई में हम दौ हमारे दौ की सोच की तरह बहुत ही कम फल अाये, केवल खुद के लायक और बहुत ही कम संख्या में ऐसे वृक्ष थे जिनमें उनकी सोच के अनुरूप अच्छे फल आये और वे समाज के काम आ सके। अच्छे फलदार वृक्षों की भारी कमी को देखकर बाबा साहेब को बडा दुख हुआ कि मैंने जिस अवधारणा व अपेक्षा से इन वृक्षों को लगाया था उनमें से अधिकतर वृक्ष तो ढूँढ ही रह गये है और कई हम दो हमारे दो से अधिक नहीं सोचते है।
यह कहानी हमारे समाज के लोगों पर भी खरी उतरती है कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान में किए गए प्रावधानों के तहत सरकारी सेवा का लाभ लेने के पश्चात अधिकतर लोग या तो दुसरों के कोई काम नहीं आते है या केवल स्वयं के परिवार तक सीमित रहते है। समाज के सामान्य अनजान व्यक्ति की मदद करने वाले लोगों की संख्या बहुत ही कम है।
बाबा साहब को अगर सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो इस बारे में हमें सोचना ही होगा और सोच को कर्म में परिवर्तित करना होगा ताकि समाज के अधिक से अधिक लोगों को हमारी अच्छी पाॅजिशन पर होने का न्योचित लाभ मिल सके।
रघुवीर प्रसाद मीना

Saturday, 8 April 2017

धार्मिक क्रियाकलापों से एक जाति विशेष के लोगो को ही लाभ होता है। हमें कम से कम लिप्त होने या बिल्कुल दूर रहने की है जरूरत।

rpmwu111
09.04.2017
आज संयोगवश मैं श्रीधाम स्थित शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के निवास स्थान पर गया एवं देखा कि वहाँ छोटे छोटे बच्चे गैरूएँ वस्त्र धारण किये हुए धूम रहे थे। मैने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि वे वहाँ संस्कृत अध्यन करते है। मैने पुछा कि क्या यहाँ कोई भी पढ़ सकता है तो उन्होंने तुरंत उत्तर दिया कि केवल ब्राह्मण ही पढ सकते है, अन्य लोग नहीं। वे वहाँ कर्म काण्ड व पूजा पाठ से सम्बन्धित विभिन्न विधायें सीखते है। बडे़ होकर शास्त्री या आचार्य बनेंगे।
तभी मेरे मन मे विचार आये कि विभिन्न प्रकार के धार्मिक क्रियाकलापों से क्या लाभ है? क्या धर्म से गरीब की गरीबी कम हो सकती है? या उसके जीवन स्तर में कोई सुधार हो सकता है? क्या सामाजिक असमानता कम हो सकती है? क्या आज तक धर्म की मान्यता से कोई वैज्ञानिक खोज सम्भव हो पाई है?
मुझे तो लगता है अंधविश्वास, धर्म में आस्था के कारण ही है। धर्म सामाजिक भेदभाव को बढाता आया है और बढाता रहेगा।
अतः आवश्यकता है कि धार्मिक अंधविश्वास के प्रदुषण से अपने आप व जानकारों को बचाया जाये।
रघुवीर प्रसाद मीना

वजन की तरह ईगो व दुर्गणों को भी कम करे।

rpmwu 109
09.04.2017

हम देखते है कि सामान्यतः लोग उनके वजन को तो नियंत्रित रखते है, यदि ज्यादा है तो पूर्ण लगन व मेहनत से कम करने की भरपूर कोशिश करते है परन्तु वे उनकी ईगो व दुर्गुणों के बारे में कोई विचार नहीं करते है। पतले दुबले लोगो की ईगो भी बहुत भयंकर हो सकती है एवं हर तरह के लोगों में दुर्गण हो सकते है।

व्यक्ति को वजन की अपेक्षा ज्यादा ईगो व दुर्गुणों से भारी नुकसान हो सकता है। अतः अच्छे जीवन यापन हेतु वजन के साथ साथ ईगो व दुर्गुणों को कम करने की महति जरूरत है।

रघुवीर प्रसाद मीना

Sunday, 26 March 2017

अच्छा जीवन जीने के लिए आवश्यकता पड़ने पर परिवारजनों, दोस्तों व जानकारों से साहारा मिलने की अनुभूति होना बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम स्वमं भी औरों के लिए इसी भावना के पात्र बनें।

rpmwu 109
26.03.17

जीवन में साहारे का बहुत अधिक महत्व होता है इस बात को समझने के लिए मानिये कि आप किसी बहुत ही सकरे (तंग) रास्ते पर जमीन पर चल रहे हैं, हो सकता है आप उस पर दौड़ भी सकते हैं। आपको पता है कि यदि गिरोगे तो जमीन से साहारा मिल जायेगा, ज्यादा चोट नहीं लगेगी। अब यदि वही तंग रास्ता ऊंचाई पर हो और दोनों ओर कोई साहारा नहीं हो तो उस पर चलना मात्र ही बहुत मुश्किल हो जाएगा। यदि ऊँचाई पर स्थित उस तंग रास्ते के दोनों ओर रेलिंग लगा दी जाए तो व्यक्ति बिना रेलिंग को टच किए हुए साहारा होने मात्र की अनुभूति से ही आराम से चल सकता है क्योंकि उसके मन में यह भावना रहती है कि यदि कुछ हुआ तो साहारा तो है। रेलिंग मुझे संभाल लेंगी, गिरने नहीं देगी।

इसी बात को जब हम जीवन के अन्य पहलुओं पर परखते हैं तो लगेगा कि जिन व्यक्तियों के पास परिवार या दोस्तों या जानकार व्यक्तियों से साहारा मिलने की सम्भावना होती है वे सामान्यतः जीवन में डरते नहीं है और उन्नति के लिए रिस्क लेने को तैयार रहते है। दूसरी ओर उन लोगों को देखो जिनके पास परिवार या दोस्त या जानकारों का साहारा नहीं है उन्हें हर कदम पर लगेगा कि कोई गलत नहीं हो जाए, वह डर डर के जीवन यापन कर करेगा।

अतः समझदारी इसी में है कि व्यक्ति अपने परिवार, दोस्तों व जानकार लोगों के साथ अच्छी तरह रहे, उनके यथासंभव काम आये ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे सभी भी उसके काम आये व उसके मन में साहारा मिलने की उम्मीद रहे।

रघुवीर प्रसाद मीना

यदि घर पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, दरवाजों पर ताला नहीं लगाया या लंबे समय तक सूना छोडा और नुकसान हो जाये तो दोष किसका है ?

rpmwu 108
26.03.2017

अक्सर इस प्रकार के प्रकरण सामने आते हैं जिनमें व्यक्ति बोलता है कि मेरे साथ गलत हो गया, मुझे भारी नुकसान कर दिया गया है इत्यादि इत्यादि। गहराई में जाने पर पता चलता है कि कई बार व्यक्ति स्वयं ही पहले तो चीजों पर ध्यान नहीं देता है, लापरवाही बरतता है या उन्हें सही ढंग से हैंडल नहीं करता है और जब परिस्थितियां विपरीत हो जाती है एवम नुकसान हो जाता है तो वह स्वयं के बजाय दूसरों पर दोष मढ़ता रह जाता है और हो चुके नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती है। 

यह बात जीवन के हर पहलु, घर व ऑफिस दोनों पर लागु होती है। यदि हम महत्पूर्ण चीजों पर समय रहते उचित ध्यान नहीं देगें तो उन्हें नुकसान होने की सम्भावना बनी रहेगी। हमें समय रहते हुए अपनी चीजों पर उचित ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति अनावश्यक या आसानी से हमें नुकसान नहीं कर सके । 

सभी को सावधान रहने तथा अपने अपने घर और कार्य क्षेत्र में अच्छे सिस्टम अपनाने जरुरत है ताकि नुकसान होने की सम्भावना कम से कम रहे । यदि सिस्टम लूज़ रहेगा तो नुकसान करने वालों को आसानी रहेगी तथा वे आसानी से नुकसान करने में सफल हो पाएंगे। यदि घर पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, दरवाजों पर ताला नहीं लगाया या लंबे समय तक सुना छोडा और नुकसान हो जाये तो दोष दूसरे का न होकर हमारा ही ज्यादा है। अतः चीजों को ढीला नहीं छोड़े व समय रहते उन पर उचित ध्यान दे। 

रघुवीर प्रसाद मीना 

Saturday, 25 March 2017

क्वालिटी एवं भगवान राम के वनवास, सीता हरण व रामायण की बाकी समस्त कहानी में सम्बन्ध - रूट काॅज एनालिसिस।

rpmwu 107
25.03.2017


 रामायण की समस्त कहानी को गहराई से देखें व सोचे कि आखिरकार सीता हरण से लेकर लंका दहन व अन्य घटनाएं क्यों घटित हुई?

सीता राम के साथ वन में गई थी, यदि राम का वनवास नहीं होता तो सीता का अपहरण भी नहीं होता और यदि सीता का अपहरण नहीं होता तो उसके पश्चात की जितनी भी कहानी है वह घटित नहीं होती।

मूल प्रश्न यह है कि राम को वनवास में क्यों जाना पड़ा? इस प्रश्न का उत्तर अगर देखें तो पता चलता है कि रानी कैकई अपने बेटे भरत को राजा बनाना चाहती थी, जिसके कारण उसने राजा दशरथ से उसे दिए गए बचनों को निभाने के लिए कहा।

गहराई में जाने से पता चलता है कि बचन क्यों दिये? बचन देने के पीछे कहानी है कि एक बार जब युद्ध के समय राजा दशरथ के रथ के पहिए का एक्सेल टूट गया था तो उस समय रानी कैकई ने एक्सेल के स्थान पर उनकी ऊँगली लगाई और राजा दशरथ को युद्ध जीताया, राजा दशरथ कैकई के कौशल, तत्परता एवं समझदारी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कैकई को दौ वचन दिये। कैकई के इन्हीं बचनों के बल पर राम भगवान को वन में जाना पड़ा व समस्त कहानी तत्पश्चात घटित हुई।

इस प्रकार रूट काॅज एनालिसिस से पता चलता है कि यदि रथ के एक्सेल की क्वालिटी सही होती तो वह युद्ध के दौरान फैल होकर नहीं टूटता और अगर ऐसा नहीं होता तो राम को वनवास में नहीं जाना पड़ता और सीता माता को जितने भी कष्ट हुए वे घटित नहीं होते।

हमारे देश में रामायण को बहुत ही शिद्दत से पढ़ा जाता है, सम्मान दिया जाता है, परंतु इस बात पर कम ही लोग ध्यान देते है कि यदि  चीजों की क्वालिटी बेहतर हो तो अप्रिय घटनाएँ कम से कम घटित होगी। अतः खराब घटनाओं के रूट काॅज पर ध्यान दे एवं अपने अपने कार्य क्षेत्र में बेहतरीन क्वालिटी मेनटेन करे।

रघुवीर प्रसाद मीना

Monday, 19 December 2016

A very very serious and dangerously damaging issue.....requiring urgent attention of everyone. यदि हम समाज का वास्तव में भला करना चाहते है तो गाँवों में फैल रही स्मैक के नशे की लत को रोकने में सभी आवश्यक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभाये।

rpmwu106  
18.12.2016
A very very serious and dangerously damaging issue.....requiring urgent attention of everyone.
यदि हम समाज का वास्तव में भला करना चाहते है तो गाँवों में फैल रही स्मैक के नशे की लत को रोकने में सभी आवश्यक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभाये।
आज एक गाँव की दो बुजुर्ग महिलाओं से बात करने के दौरान बडी़ खतरनाक बात पता चली कि गढ़ी, गाँबडा़, काडाखाना, रूँद का पुरा, कोटडा इत्यादि गाँवों के बेरोजगार युवा शराब के अलावा स्मैक का नशा करते है। इनकी सँख्या काफी अधिक है। इस प्रकार के लोगो के घरवाले खासकर उनकी पत्नियाँ बहुत अधिक परेशान रहती है, वे नशे की लत को छुडा़ने के लिए अंधविश्वास के चलते देवी देवताओं पर जाती है और बहुत जतन करती है कि किसी तरह से उनके पतियों की लत छुट जाये। ऐसे युवाओं की जिन्दगी घोर अंधकारमय है। कृपया संलग्न विडियो को अवश्य देखे https://www.facebook.com/raghuveer.p.meena/videos/1179092452139174/ ।

यदि यह लत फैलती है तो हमारी भावी पीढ़ी का भविष्य भयंकर अंधकारमय होना तय है। और हम फेसबुक पर नेताओं की भलाई बुराई में ही अपना अमूल्य समय नष्ट करते रहेगें।
हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम स्मैक बेचने वाले नेटवर्क के क्रियाकलापों को रोके, उसे कमजोर करने के लिए पुलिस को सुराग दे व उसकी मदद करें, प्रभावशाली व्यक्तियों को इस लत के विरूद्ध आवाज उठाने के लिये प्रोत्साहित करे।
जिन लोगो को लत लग चुकी है उनके उपचार के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट हेतु सलाह दे व सहायता करें।
रघुवीर प्रसाद मीना