All the able persons in the world need to make lives of the poor and downtrodden better with human dignity by innovative thinking, planning and execution.शारीरिक रूप से मजबूत को कमजोर की, अधिक बुद्धिमान को कम बुद्धिमान की और धनवान को गरीब की मदद करना ही मानवता है।
Friday, 18 June 2021
खुशी एवं संतोष : अच्छे व मददगार पलों में है।
Thursday, 17 June 2021
#कृतज्ञ रहे व स्वयं भी दूसरों के लिए सार्थक करें।
रोटी के साथ कपड़ा, घर, बिजली, घर में आने वाला पानी, टीवी, मोबाइल, चश्मा, किताबें, पेन, व्हीकल, दवाईयां व वैक्सीनस्, रेल, रोड, हवाईजहाज़, जुते, घर के उपकरण व मशीनें इत्यादि और जिसके बारे में आप सोचे उसे बनाने के पीछे बहुत मेहनत, रिसर्च व समय लगा हुआ है। हम इनको आसानी से उपयोग में लेते है।
उपरोक्तनुसार हम सभी, बहुत सारे दूसरे लोगों के ऋणी है। अतः हमें दूसरों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए एवं हमें स्वयं भी दूसरों के जीवन को बेहतर व सुलभ बनाने के लिये सार्थक काम करने चाहिए।
सादर
Raghuveer Prasad Meena
Monday, 14 June 2021
धन के अभाव में भी व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता है। आचार विचार उत्तम रखने में धन नहीं चाहिये।
उपरोक्त लेख में बहुत ही जोरदार सीख लिखी है। किसी व्यक्ति को अपने आप को उसके मन में अच्छा समझने से दूसरा कोई भी नहीं रोक सकता है। व्यक्ति अपने भाव में उच्च विचार रखें व दूसरों की मदद करने की भावना विकसित करे। ऐसा हरेक व्यक्ति को स्वयं ही करना है। हालांकि आसपास के वातावरण से फर्क पड़ता है, उदाहरणार्थ यदि कोई बाग बगीचों व फूलों में घूम रहा हो तो उसके मन में अच्छे भाव आयेंगे और यदि वह गंदे नाले या सड़ी गली चीजों के आसपास है तो वह खराब ही सोचेगा। व्यक्ति की कड़ी मेहनत व अनेकों जतनो के पश्चात भी यदि वह आसपास के वातावरण में बदलाव नहीं कर सके तो उसे जगह बदल लेना ही श्रेष्ठतम है। संगत का भी व्यक्ति की सोच बनने में अतिमहत्वपूर्ण रोल होता है, अतः संगत सोच समझकर ही तय करें एवं यदि सही नहीं है तो ज्यादा समय तक उसमे नहीं रहे, बदल लेने में ही समझदारी है।
बिना धन के ही कोई भी व्यक्ति दूसरों के मिलने पर मुस्कुरा सकता है, मीठी वाणी में बात कर सकता है, प्रशंसा कर सकता है, शुभकामनाएं दे सकता है एवं अपने हाथों से मदद कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार का व्यवहार अपनाए तो वह जीवन में स्वयं के प्रयत्नों व दूसरों की मदद एवं आशिर्वाद से जरूर ही सफल हो जाएगा।
सादर
रघुवीर प्रसाद मीना


