All the able persons in the world need to make lives of the poor and downtrodden better with human dignity by innovative thinking, planning and execution.शारीरिक रूप से मजबूत को कमजोर की, अधिक बुद्धिमान को कम बुद्धिमान की और धनवान को गरीब की मदद करना ही मानवता है।
Thursday, 3 June 2021
बीज व पेड़ में जिस प्रकार का सम्बन्ध है वैसा ही सम्बन्ध हमारे कृत्यों व जीवन की परिस्थितियों में होता है। छोटे बीज से विकसित पेड़ बहुत बड़ा आकार ले सकता है, इसी प्रकार हमारे अच्छे या बुरे कर्म स्वरूप बीज विकसित होकर जीवन में तदनुसार परिस्थितियां उत्पन्न करते है।
Wednesday, 14 April 2021
भारत रत्न बाबा सहाब डाॅ भीमराव अम्बेडकर के जीवन से सीखने योग्य महत्वपूर्ण बातें ।
Sunday, 21 March 2021
आज्ञाकारिता (Obedience) सकारात्मक व जनहितैषी होती है जबकि अंधी आज्ञाकारिता (Blind Obedience) नकारात्मक व जनविरोधी होती है। मिलग्राम प्रयोग के बारे में अवश्य जाने व उसे समझे और अंधी आज्ञाकारिता से बचे तथा आवश्यकता पड़ने पर अथॉरिटिज् के गलत आदेशों के विरूध्द जाकर भी जनहित में अपने पक्ष रखने से डरे नहीं।
Sunday, 27 September 2020
राजा राममोहन रॉय - महान समाज सुधारक
राजा राममोहन राय (22 मई 1772 - 27 सितंबर 1833) को भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। इनके पिता का नाम रमाकांत तथा माता का नाम तारिणी देवी था। राजा राममोहन राय की दूरदर्शिता और वैचारिकता के सैकड़ों उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं।वे रूढ़िवाद और कुरीतियों के विरोधी थे लेकिन संस्कार, परंपरा और राष्ट्र गौरव उनके दिल के करीब थे। वे स्वतंत्रता चाहते थे लेकिन चाहते थे कि इस देश के नागरिक उसकी कीमत पहचानें।
राजा राममोहन राय का जन्म बंगाल में 1772 में हुआ था।15 वर्ष की आयु तक उन्हें बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फ़ारसी का ज्ञान हो गया था। किशोरावस्था में उन्होने काफी भ्रमण किया। उन्होने 1809-1814 तक ईस्ट इंडिया कम्पनी के लिए भी काम किया। उन्होने ब्रह्म समाज की स्थापना की तथा विदेश (इंग्लैण्ड तथा फ़्रांस) भ्रमण भी किया।
राजा राममोहन राय ने ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी छोड़कर अपने आपको राष्ट्र सेवा में झोंक दिया। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के अलावा वे समाज में व्याप्त कुरितियों से भी लड़ाई लड़ रहे थे। उस वक्त देश के नागरिक अंधविश्वास और कुरीतियों में जकड़े थे। राजा राममोहन राय ने उन्हें झकझोरने का काम किया। बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया। देवेंद्र नाथ टैगोर उनके सबसे प्रमुख अनुयायी थे। आधुनिक भारत के निर्माता, सबसे बड़ी सामाजिक - धार्मिक सुधार आंदोलनों के संस्थापक, ब्रह्म समाज, राजा राम मोहन राय सती प्रणाली जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अंग्रेजी, आधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी और विज्ञान के अध्ययन की वकालत की।

