All the able persons in the world need to make lives of the poor and downtrodden better with human dignity by innovative thinking, planning and execution.शारीरिक रूप से मजबूत को कमजोर की, अधिक बुद्धिमान को कम बुद्धिमान की और धनवान को गरीब की मदद करना ही मानवता है।
Monday, 28 August 2017
देश में खराबियों की असली जड़ : Hypocrisy - दोगलापन अर्थात कथनी एवं करनी में अन्तर।
Saturday, 26 August 2017
You Start Dying Slowly का हिन्दी अनुवाद..
- करते नहीं कोई यात्रा,
- पढ़ते नहीं कोई किताब,
- सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
- करते नहीं किसी की तारीफ़।
- मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
- नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।
- बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
- चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
- नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,
- नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या
- आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।
- नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।
- नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
- अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
- अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
- अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की..।
*तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं..!!*
Friday, 25 August 2017
सवाई माधोपुर के पास बनास नदी में बजरी की अंधाधुंध खनन एवं उसके दुष्परिणाम।
24.08.2017
दिनांक 19 अगस्त 2017 को मैं सवाई माधोपुर गया था। वहां देखा कि बनास की बजरी रेलवे के वैगनस् में लोड होकर लखनऊ के पास मोहनलालगंज भेजी जा रही है। लोगों से चर्चा की तो पता लगा कि प्रतिदिन हजारों ट्रक बजरी सवाई माधोपुर के पास स्थित बनास नदी से मैकेनाइज्ड तरीके से खनन एवं लोडिंग के पश्चात यूपी, दिल्ली, हरियाणा व अन्य स्थानों पर भेजी जा रही है। लोगों ने यह भी बताया कि यह खनन बड़े स्तर पर एक ही कम्पनी के तहत की जा रही है एवं इसमें क्षेत्र व प्रदेश के बड़े नेताओं व अन्य बडे़ लोगों का सहयोग या हिस्सेदारी है। इनके प्रभाव के कारण प्रशासन भी बिलकुल मौन रहता है।
1. एक बड़ी फर्म या कम्पनी व उसके साझादारों को ही लाभ, सामान्य व्यक्तियों को कोई लाभ नहीं।
2. खनन व लोडिंग के कार्य मैकेनाइज्ड होने के कारण लोकल मजदूरों को कोई रोजगार मुहैया नहीं।
3. बजरी बनने की प्रक्रिया में हजारों साल लगते हैं और अब बारिश भी कम हो रही है जिसके कारण आने वाले समय में क्षेत्र में बजरी की मात्रा बहुत कम हो जाएगी और बजरी की उपलब्धता भयंकर रूप से घट जायेगी और आसपास के लोगों को बजरी बहुत महंगी दर पर मिलेगी या हो सकता है कि बाहर से लानी पड़े।
4.भारी खनन से पर्यावरण व इकोलॉजी पर कुप्रभाव।
5. सरकार को भी रायल्टी के रूप में बहुत कम राशि की प्राप्ति हो रही है जबकि खनन करने वाली कंपनी बहुत बड़ा लाभ कमा रही है।
Sunday, 30 July 2017
समाज को लाभान्वित होने की उम्मीद.....
आने वाले दिनों में ऐसे महानुभावों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। आवश्यकता है कि ऐसे सभी लोगो के अनुभव व एनर्जी का समाज हित में सदोपयोग हो। देखने में यह भी आया है कि कई लोग सेवानिवृत्ति के पश्चात या तो स्वमं के परिवार के कार्यों या धार्मिक अंधविश्वास के प्रदुषण में इतने व्यस्त हो जाते है कि वे समाज से और अधिक कटआॅफ हो जाते हैं।
समाज को भी चाहिये कि एेसे अनुभवी लोगों को आदर दें ताकि उनके मन में समाज सेवा हेतु और जिज्ञासा जाग्रत हो।
कृपया सभी अपने अपने विचार व्यक्त करें कि किस तरह समाज, सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों से अघिक से अधिक लाभान्वित हो सके।
रघुवीर प्रसाद मीना
Tuesday, 18 April 2017
समाज के पढेलिखे लोग खरे नहीं उतर रहे है भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की अपेक्षाओं पर....
Saturday, 8 April 2017
धार्मिक क्रियाकलापों से एक जाति विशेष के लोगो को ही लाभ होता है। हमें कम से कम लिप्त होने या बिल्कुल दूर रहने की है जरूरत।
09.04.2017
वजन की तरह ईगो व दुर्गणों को भी कम करे।
rpmwu 109
09.04.2017
हम देखते है कि सामान्यतः लोग उनके वजन को तो नियंत्रित रखते है, यदि ज्यादा है तो पूर्ण लगन व मेहनत से कम करने की भरपूर कोशिश करते है परन्तु वे उनकी ईगो व दुर्गुणों के बारे में कोई विचार नहीं करते है। पतले दुबले लोगो की ईगो भी बहुत भयंकर हो सकती है एवं हर तरह के लोगों में दुर्गण हो सकते है।
व्यक्ति को वजन की अपेक्षा ज्यादा ईगो व दुर्गुणों से भारी नुकसान हो सकता है। अतः अच्छे जीवन यापन हेतु वजन के साथ साथ ईगो व दुर्गुणों को कम करने की महति जरूरत है।
रघुवीर प्रसाद मीना
Sunday, 26 March 2017
अच्छा जीवन जीने के लिए आवश्यकता पड़ने पर परिवारजनों, दोस्तों व जानकारों से साहारा मिलने की अनुभूति होना बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम स्वमं भी औरों के लिए इसी भावना के पात्र बनें।
rpmwu 109
26.03.17
जीवन में साहारे का बहुत अधिक महत्व होता है इस बात को समझने के लिए मानिये कि आप किसी बहुत ही सकरे (तंग) रास्ते पर जमीन पर चल रहे हैं, हो सकता है आप उस पर दौड़ भी सकते हैं। आपको पता है कि यदि गिरोगे तो जमीन से साहारा मिल जायेगा, ज्यादा चोट नहीं लगेगी। अब यदि वही तंग रास्ता ऊंचाई पर हो और दोनों ओर कोई साहारा नहीं हो तो उस पर चलना मात्र ही बहुत मुश्किल हो जाएगा। यदि ऊँचाई पर स्थित उस तंग रास्ते के दोनों ओर रेलिंग लगा दी जाए तो व्यक्ति बिना रेलिंग को टच किए हुए साहारा होने मात्र की अनुभूति से ही आराम से चल सकता है क्योंकि उसके मन में यह भावना रहती है कि यदि कुछ हुआ तो साहारा तो है। रेलिंग मुझे संभाल लेंगी, गिरने नहीं देगी।
इसी बात को जब हम जीवन के अन्य पहलुओं पर परखते हैं तो लगेगा कि जिन व्यक्तियों के पास परिवार या दोस्तों या जानकार व्यक्तियों से साहारा मिलने की सम्भावना होती है वे सामान्यतः जीवन में डरते नहीं है और उन्नति के लिए रिस्क लेने को तैयार रहते है। दूसरी ओर उन लोगों को देखो जिनके पास परिवार या दोस्त या जानकारों का साहारा नहीं है उन्हें हर कदम पर लगेगा कि कोई गलत नहीं हो जाए, वह डर डर के जीवन यापन कर करेगा।
अतः समझदारी इसी में है कि व्यक्ति अपने परिवार, दोस्तों व जानकार लोगों के साथ अच्छी तरह रहे, उनके यथासंभव काम आये ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे सभी भी उसके काम आये व उसके मन में साहारा मिलने की उम्मीद रहे।
रघुवीर प्रसाद मीना