Tuesday, 6 November 2018

जयपुर मंडल का रिनोवेटेड कंट्रोल ऑफिस।

rpmwu150
06.11.2018

जयपुर मंडल का रिनोवेटेड कंट्रोल ऑफिस।
जयपुर मंडल के कंट्रोल ऑफिस को अभी हाल में पूर्ण रूप से रिनोवेट किया गया है, जिसमें निम्नलिखित कार्य मुख्य रूप से किए गए -
1. संपूर्ण ऑफिस की फॉलस् सीलिंग की हाईट जोकि एक पुरानी अनुपयोगी एयर डक्ट के कारण बहुत कम थी उसको हटाकर, हाईट बढ़ाई गई। बड़ी हुई हाइट में ग्लास पार्टीशन लगाया गया, जिसके कारण गैलरी जिसमें साधारणत: अंधेरा रहता था उसमें बगल के कमरों से लाईट आने के कारण अपने आप प्रकाशमान हो गई।
2. संपूर्ण ऑफिस में टाइल्स बहुत पुरानी हो चुकी थी एवं उनका कलर भी डल था, उन्हें ब्राईट शेड़ की बडी़ विट्रीफाईड़ टाईलों से बदलवाया गया। टाईलस् के नीचे फ्लोर में विधुत व टेलिफ़ोन/इंटरनेट के वायरस् व केबलस् प्लानिंग से डाले गये।
3. कंट्रोल ऑफिस में वायरस् एवं केबलस् भलीभांति नहीं लगे हुए थे, एक जगह से दूसरी जगह फाॅलस् सीलिंग के ऊपर से जाने के कारण उनका लोड़ उस पर आ रहा था। इन्हें अच्छे तरीके से केबल ट्रे में डाला गया। कौन सा वायर या केवल किधर जा रही है, अासानी से मालूम किया जा सकता है। साथ ही इनका लोड फॉलस्  सीलिंग पर नहीं आएगा।
4. कंट्रोल ऑफिस का फर्नीचर अलग अलग तरह का और काफी पुराना था उसके स्थान पर कस्टमाईजड़ मॉड्यूलर फर्नीचर बनवाया गया और साथ ही में सभी स्टाॅफ को अच्छी मूवेबल कुर्सियां उपलब्ध करवाई गई।
5. कई स्थानों पर  दीवारें थी उन्हें हटाकर  ग्लास पार्टीशन बनवाए गए जिसके कारण  कार्य करने  का एक जोरदार माहौल तैयार हो गया है।
6. मुख्य दरवाजों पर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है  जिससे केवल अधिकृत व्यक्ति ही कंट्रोल में फिंगर प्रिंट्स  के माध्यम  से प्रवेश कर सकते हैं।
जो लोग रेलवे के कंट्रोल से परिचित है वे समझ सकते हैं कि एक वर्किंग रेलवे कंट्रोल में इतना कार्य करवाना कितना मुश्किल है, परंतु हमारे अधिकारियों और स्टाॅफ सभी ने मिलकर इस चैलेंज को स्वीकारा और कंट्रोल के रिनोवेशन के कार्य को सम्पूर्ण करने में पूर्ण सहयोग दिया।
जयपुर मंडल की मंडल रेल प्रबंधक श्रीमती सौम्या माथुर की पहल एवं अपर मंडल रेल प्रबंधक/इंफ्रा श्री आर एस मीना, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक श्री केके मीना, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री आरके गुडेश्वर, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर श्री आरके शर्मा, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर एस्टेट श्री डीएल गर्ग, वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक श्री राजकुमार, वरिष्ठ मंडल फाइनेंस मैनेजर श्रीमती अभिलाषा झां मिश्र,, मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री नरेंद्र सेहरा, सहायक मंडल परिचालन प्रबंधक श्री दिलीप सिंह, सहायक अभियंता श्री के के शर्मा, सहायक विधुत इंजीनियर एमएल गुप्ता व उनके डिपार्टमेंट के अधिकारियों और पर्यवेक्षकों का बहुत योगदान रहा है। कंट्रोल में कार्यरत पर्यवेक्षक श्री मदन सिंह चौहान, श्री हनुमान सिंह, अखिल गुप्ता, महेश शर्मा व एसके शर्मा की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। इनके साथ साथ जितने भी लोग कंट्रोल में कार्यरत हैं उन्होंने करीब 2 माह कार्य चलने के दौरान धूल मिट्टी भरे वातावरण में कार्य किया और परेशानी का सामना उठाया। सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।
रघुवीर प्रसाद मीना
अपर मंडल रेल प्रबंधक (आॅपरेशंस)
जयपुर मंड़ल, उत्तर पश्चिम रेलवे।

Sunday, 4 November 2018

स्वमं पर ध्यान नहीं देकर दूसरे को सुधारने में ऊर्जा नष्ट करना हमारे देश की एक गंभीर समस्या है।

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04.11.2018

देश में हिंदुओं के धर्मगुरुओं व नेताओं को मुसलमानों के रीति रिवाजों जैसे तीन तलाक को ठीक करना बहुत जरूरी लग रहा है जबकि हिंदू धर्म स्वयं में जो अंधविश्वास है, दलितों के लिए छूआछूत व अपमान है एवं अन्य कई ऐसे रीति रिवाज जिनसे हिंदू धर्म शर्मसार होता है उन्हें दूर करने के लिए उनके पास समय नहीं है। इसी प्रकार जिन लोगों को आरक्षण नहीं मिला हुआ है उनको आरक्षण के अंतर्गत जो जातियां या जनजातियां उन्नति कर रही है उनकी ज्यादा चिंता है।
मैं इस बात में विश्वास रखता हूं कि व्यक्ति सोच समझकर व दृढ़ निश्चय से स्वयं को तो बदल सकता है परन्तु दूसरे को केवल उसके आचरण एवं चाल चलन से प्रभावित ही कर सकता है। दूसरे को बदलना उसके वश में है। यह बात समाज के परिपेक्ष में भी  लागू होती है। यदि कोई व्यक्ति या समाज वास्तव में सुधार हेतु बदलाव चाहता है तो उसे समय में बदलाव करना चाहिए, दूसरा व्यक्ति या समाज देखकर अच्छे गुणधर्म व आचरण को अपना लेगा।
परंतु देखा जा रहा है कि व्यक्ति स्वयं बीमार है परंतु दवाई दूसरे को देने की कोशिश करता है जब तक ऐसा होता रहेगा तो बीमार व्यक्ति स्वस्थ नहीं हो पायेगा। अतः यदि वास्तव में सुधार करना ही है तो पहले शुरुआत स्वयं से करें, दूसरे लोग स्वत: देखकर खुद ही उनमें बदलाव कर लेंगे। ऐसा करने से ही व्यक्ति स्वयं, समाज व देश की भलाई संभव है।
सुधार की हर कड़ी के लिए पहले स्वयं से शुरू करें , दूसरे अपने आप ही अच्छाई के लिए देखकर उनमें बदलाव कर लेगें।
रघुवीर प्रसाद मीना

Saturday, 3 November 2018

राम मंदिर पर अचानक मिडिया अटेंशन व बेवजह बहस।

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03.11.2018

राम मंदिर पर जोरदार बहस व मिडिया अटेंशन आजकल पुन: प्रारंभ हो गया है। देश के साधारण नागरिक को राम मंदिर बनने या नहीं बनने से बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ता है। परंतु जो लोग राजनीतिज्ञ है उनमें से कुछ मंदिर निर्माण की बात का फायदा उठाना चाहते हैं और अयोध्या में मंदिर निर्माण की बात को राजनीति से प्रेरित कर लोगों में हिंदुत्व के नाम पर यूनिटी बनाना चाहते हैं ताकि चुनाव में उनको लाभ हो सके।
मंदिर निर्माण पर इतना ज्यादा मीडिया का समय व महत्व तथा लोगों का ध्यान न्यायोचित नहीं है। यदि देश के नागरिक मंदिर की बात को छोड़ कर सम्पूर्ण देश के महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे अशिक्षा, गरीबों की दशा, पीने के पानी की समस्या, चलने योग्य सड़को का अभाव, बिजली की आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था, किसानों का ऋण, मजदूरों को न्यूनतम वेतन नहीं मिलना, रू. का अवमूल्यन, डीजल/पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतें, बेरोजगारी, अंधविश्वास, जातिवाद व धर्म के दंश इत्यादि इत्यादि बेसिक चीजों पर ध्यान दें तो देश के लोगों की दशा में बहुत जल्दी अधिक सुधार हो सकता है।
हिन्दूओं के लिए राम मंदिर बनवाने के पीछे पागल होना धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण (DAP) का असर है। वास्तव में जो हिन्दू धर्म के प्रति समर्पित है उन्हें चाहिए कि DAP को कम करवायें, देश में  धार्मिक आधार पर जो कट्टरता पनपती जा रही है उसे कम करवाएं और धर्म के नाम पर दलितों को लगातार तंग किए जाने के प्रकरण को रुकवाएं।
मुसलमानों के नेताओं व धर्म गुरुओं की सोच में समझदारी की कमी झलकती है, वे अनावश्यक मंदिर निर्माण के स्थान को तूल दे रहे है। जब देश की मेजॉरिटी जो कि हिंदू है और यह मानती है कि उनके भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में उस विशेष स्थान पर हुआ था तो मुसलमानों को मंदिर बनाने देने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं करनी चाहिए। यदि उस स्थान पर मस्जिद रही भी है तो सबको पता है कि देश में 1000 ईसवीं के बाद ही मस्जिदें बनी है जबकि भगवान राम का जन्म मस्जिदें बनने से बहुत कहीं पहले का है। मुसलमानों को समझदारी दिखाते हुए खुशी से उस स्थान को  राम मंदिर  बनाने के लिए  छोड़ देना चाहिए और  मस्जिद दूसरे स्थान पर  बनाई जा सकती है। यदि मुसलमान ऐसा करते हैं तो उनके लोगों के हित के लिए यह बहुत  बड़ी बात होगी। मुसलमानों को उनके लोगों के पिछड़ेपन, अशिक्षा, गरीबी  व अंधविश्वास को दूर करने की ओर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें अपने लोगों का ध्यान इन चीजों पर आकर्षित करवाना चाहिए ना कि मंदिर और मस्जिद की लड़ाई में।
रघुवीर प्रसाद मीना

Friday, 2 November 2018

DAP का दुष्परिणाम।

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02.11.2018

वीडियो में देखें कि किस प्रकार धर्म के नाम पर दलितों का अभी भी बहिष्कार किया जा रहा है, एक दलित दूल्हा व उसकी माँ को हनुमानजी के मंदिर पर चढ़ने के लिए पब्लिकली मारापीटा व बेइज्जत किया। दूसरी तरफ लोग बोलते हैं की जातिगत आधार पर आरक्षण व अन्य लाभ नहीं होने चाहिए। जब जाति देख कर यदि किसी व्यक्ति का अपमान किया जाता है तो उस समय यह बात क्यों नहीं समझ में आती है?
यदि देश को आगे बढ़ाना है तो पहले जाति के आधार पर होने वाले डिस्क्रिमिनेशन को समाप्त करना होगा। साथ ही में दलितों को भी धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण से दूर रहने की जरूरत है। ये लोग अनावश्यक रूप से धार्मिक गतिविधियों में बहुत ज्यादा लिप्त रहते हैं, इनके पीछे रहने का यह भी एक मुख्य कारण है।
यदि कोई व्यक्ति जातिगत भेदभाव को जानने हेतु लिटमस टेस्ट करना चाहे तो उसे शांत भाव में आंखें बंद करके अपने आप से निम्न प्रश्न का उत्तर पूछना चाहिये -
"क्या वह अगले जन्म में किसी दलित के घर जन्म लेना चाहेगा?"
जब तक इस प्रश्न का उत्तर नकारात्मक आता रहेगा तो लोगों को कोई हक नहीं है कि वह जाति के आधार पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों की भर्त्सना करें।
आवश्यकता है कि सभी लोग खासकर दलित धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण में विश्वास कम करें व जाति के आधार पर यदि कोई किसी को परेशान या तंग करें तो सरकार को उसके विरूद्ध उदाहरण पेश करने लायक कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

Sunday, 28 October 2018

मंदिरों में दान करना छोड़े।

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28.10.2018

मंदिरों में दान करने की बजाय गरीब व असहाय की मदद कहीं अधिक समझदारी की सोच है। छात्रावास बनाने व शिक्षा में आर्थिक सहयोग देना कहीं बेहतर है। मंदिरों में दान देने का 99% प्रतिशत मतलब यह है व्यक्ति यह दिखा रहा है कि उसने कोई गलत कार्य या पाप किया है एवं उन गलत कामों या पाप से मुक्ति हेतु मंदिर में फीस जमा करवा रहा है।
क्या मंदिर पाप से मुक्ति दिलाने के केन्द्र है? यदि ऐसा है तो क्या दान करने वाले लोग अप्रत्यक्ष रूप से समाज को यह नहीं दिखा रहे है कि मंदिर का देव (भगवान) पापियों की सहायता करता है? उन लोगों को गलत कामों या पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। यदि ऐसा है तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आवश्यकता है कि हम यह समझे कि दिये जा रहे दान से किसे लाभ होने वाला है? असली दान तो #नेकीकरदरियामेंडाल की फिलॅास्फी के अनुसरण में है। यदि धन को परोपकार हेतु दान में देना ही चाहते है तो गरीब व असहाय की मदद करें व छात्रावास बनाने एवं शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग दे।
मेरे मतानुसार व्यक्ति यदि उसकी विभिन्न ड्यूटीज् को भलीभांति निष्पादित करता है तो उससे बड़ी अन्य कोई पूजा नहीं है। यदि कोई दान ही करना चाहता है तो ड्यूटी पर अतिरिक्त समय देकर समय का दान कर सकता है।
रघुवीर प्रसाद मीना

Friday, 26 October 2018

देश में धन का असमान बंटवारा ।


rpmwu144
25.10.2018

देश में धन के असमान बंटवारा के बारे में सभी लोग बात करते हैं, सर्वे के आंकड़े चौकाने वाले है। समरी निम्न प्रकार है -
  1 प्रतिशत अमीर लोगों के पास 51.1% दौलत।
10 प्रतिशत अमीर लोगों के पास 77.4% दौलत।
60 प्रतिशत गरीब लोगों के पास महज 4.7% संपत्ति। ये लोग मजदूर व किसान है।
195 में देशों में से 128 वें स्थान पर है भारत प्रति व्यक्ति औसत संपत्ति के मामले में।
उक्त आंकड़े क्या इंगित करते हैं? ये आंकड़े सीधे सीधे दर्शाते है कि प्रत्यक्ष मेहनत करने वाले लोगों की अपेक्षा चीजों को मैनेज करने वाले लोगों के पास बहुत अधिक धन सम्पदा है। मेहनत करने वाले लोग गरीब ही है, जो मजदूर है उनको मेहनताना बहुत कम दिया जाता है एवं किसानो़ को लागत की तुलना में फसल की उचित दर नहीं मिलती है या लोगों के पास न तो मजदूरी और न ही खेती के अवसर है। यहाँ तक कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन या न्यूनतम सपोर्ट प्राईस में से भी मैनेज करने वाले समृद्ध विचौलिए एक बड़ा हिस्सा रख लेते है। जब लोग निजि कार्य करवाते हैं तो काम करने वालों को कम से कम भुगतान करते हैं। किसान की फसल खरीदते समय विभिन्न वाहनों से उसको ठगा जाता है। कमजोर के साथ यह अन्यायपूर्ण रवैया सदियों से चला आ रहा है।
गरीब को पहले राजा महाराजा व उनके सिपासालान लुटते थे, बेगारी (बिना भुगतान के काम) करवाते थे व फसल में से भारी हिस्सा टैक्स के रूप में ले लेते थे। अब ठेकेदार या पढे़लिखे लोग इन्हें मुर्ख बना रहे है। सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन नहीं होने से सरकार भी अभी तक गरीब की स्थिति में समुचित सुधार नहीं कर पाई है।
सरकार को चाहिये कि न्यूनतम मजदूरी एवं न्यूनतम सपोर्ट प्राईस की चोरी करने वाले लोगों पर कडा़ अंकुश लगाये, ऐसे कृत्य को बहुत कठोरता से डील करें। दूरदराज के क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करें ताकि प्रोसेस के दौरान वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके व बाद में रोजगार की अपाॅर्चुनिटी बढ़ सके।
हम सभी व्यक्तिगत तौर पर अपनी अपनी कैपेसिटी में हर सम्भव प्रयास करें कि गरीब लोगों के साथ न्याय हो, उन्हें उनका हक मिले। यदि गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तो उनकी भावी पीढ़ी देश की अच्छी नागरिक बनेंगी।
अमीर लोगों को भी चाहिये कि वे प्रोफिट मार्जिन को कम रखे व मेहनत करने वाले लोगों को उनका हक देवे।
रघुवीर प्रसाद मीना

Saturday, 20 October 2018

अमृतसर में घटित हुए दर्दनाक हादसे के लिये DAP व लोगों की स्वयं की लापरवाही तथा आयोजक जिम्मेदार है।

rpmwu142
20.10.2018

दिनांक 19.10.2018 को पंजाब के अमृतसर में एक बहुत ही दर्दनाक हादसा हुआ जिसमें 61 लोग रेलगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। ये लोग रेलवे ट्रैक पर अनाधिकृत रूप से दशहरे के अवसर पर रावण दहन देखने एकत्रित हुए थे। इन्होंने इस बात की परवाह नहीं की कि रेललाइन पर रेलगाड़ी आ सकती है। जिस समय हादसा हुआ था उस समय अंधेरा हो चुका था, ये लोग रावण दहन देखते रहे और तेज रफ्तार की रेलगाड़ी से रौंदे गये।
यह हादसा बहुत ही दर्दनाक एवं खेदजनक है। इस हादसे के लिए आयोजनकर्ता एवं ये लोग स्वयं जिम्मेदार है। आयोजनकर्ताओं को रेलवे ट्रैक के इतने नजदीक कार्यक्रम नहीं रखना चाहिए था एवं इन लोगों को भी रेल ट्रैक पर इकठ्ठा नहीं होना चाहिये था।
मरने वालों में अधिकतर उन लोगों की संख्या थी जो कम पढ़े लिखे व कमजोर वर्ग के थे। ऐसा केवल इन लोगों की धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण (DAP) में आस्था के कारण हुआ। जब भी DAP की घटनाओंं में भीड़ की भगदड़ से लोग मरते हैं तो वे गरीब व पिछड़े लोग ही अधिकतर होते हैं। जरूरत है लोगो को DAP से दूर रहने हेतु जागरूक करने की।
रेल्वे एक्ट 1989 की धारा 147 के अनुसार रेल सम्पत्ति पर ट्रेस पासिंग करना दण्डनीय अपराध है। रेलवे ट्रैक पर जाना या पार करना भी इसी श्रेणी में आते हैं। जयपुर में खासकर गांधीनगर से जगतपुरा व अन्य कई स्थानों पर भी लोग रेल ट्रैक पर अनाधिकृत रूप से जाते है, कई बार आती हुई ट्रेन के सामने सेल्फी लेते है। लगभग हर दिन कहीं न कहीं एकाध हादसा होता है, फिर भी लोग नहीं समझ रहे है।
हम सभी को स्वयं को समझने व दूसरों को DAP से दूर रहने व रेल ट्रैक पर ट्रेसपासिंग नहीं करने के लिए समझाने की जरूरत है।

Sunday, 7 October 2018

DAP (धार्मिक अंधविश्वास का प्रदूषण) ने किया है देश का सबसे ज्यादा नुकसान।

rpmwu141
06.10.2018

यदि देश को विकसित बनाना है और नागरिकों की उन्नति चाहते हैं तो हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ेगा और धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण से स्वयं को दूर रखना होगा एवं जो लोग कम समझदार है उन्हें भी दूर रहने के लिए बेझिझक सलाह देनी होगी। कृपया निम्नलिखित का अवलोकन करें और समझे कि हमें क्या करना चाहिए?
यदि मंत्र,तंत्र,यज्ञ,पूजा, प्रसाद,अगरबत्तियाँ लगाने,परिक्रमा देने,कथा-भागवत सुनने इत्यादि से काम चल जाता तो देश की गरीबी, अशिक्षा, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर का खस्ताहाल, तेल के बढे़ दाम, डाॅलर की तुलना में रू. की वैल्यू में भारी गिरावट, हर स्तर का भ्रष्टाचार, बैंक से पैसे लेकर भागने, क्राईम, रेप, बार्डर पर तनाव, कश्मीर आदि समस्याएं क्यों नहीं इनसे ठीक की जा रही है?
बच्चे को काला टिका लगाने से उसका संरक्षण होता तो भारत मे बाल मृत्यु दर शून्य क्यों नहीं है?
गाड़ी मे निंबू मिर्च बांधने से सुरक्षा मिलती तो भारत मे दुर्घटना मृत्यु दर शून्य क्यों नहीं है?
पुजा करने से व्यापार, उद्योग धंधो मे बरकत आती तो देश के सभी लोग धनाढ्य क्यों नहीं बन गये?
बडे़-बडे़ बाबाओं के पास जाने से दुखों का निवारण हो सकता है तो सभी बाबाओ के भक्त सुखी क्यों नहीं है?
कुंडली मिलाने से अगर सभी पती-पत्नी का मन जुड़ गये होते तो सभी अरेंज-मैरिज सुखद क्यों नहीं है?
यज्ञ करने से कोई टीम जीत जाती तो भारत विश्व में किसी भी खेल में नहीं हारता!
 #मुहूर्त : जब जन्म व मृत्यु का कोई मुहूर्त नहीं है तो और कार्यक्रमों के मुहूर्त का क्या महत्व है?
मुझे तो लगता है कि हमारे देश में यदि किसी चीज ने सबसे अधिक नुकसान किया है तो वह धार्मिक अंधविश्वास का प्रदूषण (DAP) है। DAP की वजह से एक बहुत बड़ी जनसंख्या को डेमोरलाईज कर दिया गया और वे लोग भी इसके जाल में गहरे फंस गये। लोग मेहनत व वैज्ञानिक रास्ते की बजाय पूजा पाठ, परिक्रमा, प्रसाद इत्यादि के माध्यम से समस्याओं के हल खोजने लग गये।
DAP के कारण जो लोग काम करते थे उनकी वैल्यू कम आॅकी जाने लगी एवं जो लोग काम नहीं करते थे और केवल निर्देश या थ्योरीटिकल ज्ञान देते रहे उनकी वैल्यू व काम करने वालों की वैल्यू में बहुत अधिक अंतर कर दिया गया। इसी का कारण है कि देश में स्किल कम होती गई। वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं अपनाने से आज डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत में जो गिरावट आई है उसका मुख्य कारण भी यह है कि हमें बहुत सारी तकनीकी चीजें खासकर हथियार व आई. टी. के उपकरण बाहर से आयातित करने पड़ रहे हैं और रुपए का अवमूल्यन हो रहा है और दिनोंदिन हम विदेशी चीजों के ऊपर बहुत अधिक निर्भर हो रहे हैं।
हमें तुरंत प्रभाव से चाहिए कि धार्मिक अंधविश्वास के प्रदूषण (DAP) से मुक्त हो और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाये व देश में काम करने वालों की वैल्यू करें ताकि अधिक से अधिक चीजें हमारे देश में ही बन सके और विदेश से होने वाले आयात में कमी हो और रुपए की वैल्यू में बढ़ोतरी हो।
रघुवीर प्रसाद मीना